श्रीलंका के एंटी-ग्राफ्ट कमीशन ने पूर्व फर्स्ट लेडी Shiranthi Rajapaksa को पब्लिक फंड के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई देश में वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ चल रही कड़ी जांच का हिस्सा है।
श्रीलंका के 'कमीशन टू इन्वेस्टिगेट एलिगेशन ऑफ ब्राइबरी ऑर करप्शन' (CIABOC) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को पूर्व फर्स्ट लेडी Shiranthi Rajapaksa को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला 'सिरिलिया सेविया फाउंडेशन' (Siriliya Saviya Foundation) से जुड़ी एक पुरानी जांच का हिस्सा है।\n\nआरोप है कि बच्चों के अस्पताल 'लेडी रिजवे हॉस्पिटल' के लिए सीटी स्कैनर खरीदने हेतु आवंटित LKR 10 मिलियन (1 करोड़ श्रीलंकाई रुपये) की राशि का गबन किया गया और वह उपकरण कभी खरीदा ही नहीं गया। कोलंबो की चीफ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 13 अक्टूबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह पहली बार है जब देश में किसी पूर्व फर्स्ट लेडी को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।\n\n### जांच का दायरा बढ़ा\n\nयह कार्रवाई सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है। इसी दिन, अथॉरिटीज ने नेशनल सेविंग्स बैंक (NSB) के पूर्व चेयरमैन Pradeep Kariyawasam को भी हिरासत में लिया है, जिन पर फाउंडेशन के वित्तीय लेनदेन में प्रोटोकॉल का पालन न करने का आरोप है। साथ ही, पूर्व विदेश मंत्री Rohitha Bogollagama को भी 2006 में लंदन में हुए प्रमोशनल इवेंट्स में 'बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट' के फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार किया गया है।\n\nनिवेशकों के लिए, यह घटनाक्रम श्रीलंका में गवर्नेंस और रेगुलेटरी माहौल में आए बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि ये कानूनी कार्रवाई हैं, लेकिन इनका असर देश की संस्थागत पारदर्शिता और राजनीतिक स्थिरता पर पड़ना तय है, जिस पर ग्लोबल मार्केट की नजरें बनी रहेंगी।
