South Korea ने Ukraine पर एक गुप्त समझौते को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला रूस में पकड़े गए दो North Korean सैनिकों के ट्रांसफर से जुड़ा है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक खटास पैदा हो गई है।
South Korean राष्ट्रपति कार्यालय ने Kyiv को आधिकारिक रूप से फटकार लगाते हुए इसे भरोसे का बड़ा उल्लंघन करार दिया है। मामला जनवरी 2025 का है, जब रूस के कुर्स्क क्षेत्र में पकड़े गए दो North Korean सैनिकों को साउथ कोरिया लाया गया था। सोल का कहना है कि यूक्रेन के नेतृत्व द्वारा इस जानकारी को सार्वजनिक करने से दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को भारी नुकसान पहुंचा है।
विवाद की जड़: कॉन्फिडेंशियलिटी पैक्ट
साउथ कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक, यह ट्रांसफर बेहद गोपनीयता के साथ किया गया था ताकि सैनिकों और नॉर्थ कोरिया में मौजूद उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इसका जिक्र किया, जिसके बाद कीव ने किसी भी तरह के लिखित समझौते से इनकार कर दिया है। सोल ने कीव के इस इनकार को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि खुफिया जानकारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए यह समझौता अनिवार्य था।
डिफेंस सेक्टर पर असर
निवेशकों के नजरिए से यह घटना साउथ कोरिया की विदेशी नीति के नाजुक संतुलन को दर्शाती है। साउथ कोरिया दुनिया के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी है, जहाँ Hanwha Aerospace और Korea Aerospace Industries जैसी दिग्गज कंपनियां अपने कदम तेजी से फैला रही हैं। ऐसी कूटनीतिक अस्थिरता का असर क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार के जानकार इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या दोनों सरकारें इस विवाद को बातचीत से सुलझा पाएंगी, या फिर इसका असर भविष्य के इंटरनेशनल डिफेंस कोलैबोरेशन पर पड़ेगा।
