एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk ने केंद्र सरकार को लद्दाख में चुनी हुई विधानसभा बनाने के लिए **1** साल का समय दिया है। यह मांग **9** सितंबर, **2026** को होने वाली Leh Apex Body और गृह मंत्रालय की अहम बैठक से ठीक पहले आई है।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के सामने लद्दाख के लिए एक स्पष्ट लेजिस्लेटिव रोडमैप की मांग रखी है। उनका कहना है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से पहले एक चुनी हुई विधानसभा का गठन जरूरी है, ताकि क्षेत्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। यह कदम लद्दाख में राजनीतिक स्वायत्तता की मांग को और तेज करता है।
9 सितंबर की बैठक पर नजरें
सभी की निगाहें Leh Apex Body की सब-कमेटी और गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के बीच 9 सितंबर, 2026 को होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। इस चर्चा में संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संवैधानिक सुरक्षा और पूर्व में हुए नागरिक अशांति की जांच रिपोर्ट जैसे अहम मुद्दे शामिल होंगे। फिलहाल, तनाव कम करने के लिए स्थानीय समूहों ने कारगिल से लेह तक के प्रस्तावित पैदल मार्च को फिलहाल रोक दिया है।
विवाद और रेगुलेटरी चुनौतियां
वांगचुक की सक्रियता के बीच पिछले कुछ विवाद भी चर्चा में हैं। सीबीआई (CBI) द्वारा वित्तीय अनियमितताओं की जांच और उनकी संस्था SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द होना, इस पूरे घटनाक्रम में एक जटिल बैकग्राउंड बनाता है। लद्दाख एक बॉर्डर एरिया होने के कारण, यहां लिया गया कोई भी प्रशासनिक फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस लॉजिस्टिक्स पर बड़ा असर डालता है। अब सबकी नजरें 9 सितंबर की बातचीत के नतीजों पर हैं कि क्या सरकार इन मांगों पर कोई ठोस समयसीमा तय करती है।
