बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने भारत में आयोजित क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों से दूरी बनाने वाली मौजूदा सरकार की नीति की कड़ी आलोचना की है। हाल ही में बांग्लादेश ने BRICS और BIMSTEC जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा नहीं लिया, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
कूटनीतिक रुख पर उठाए सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने ढाका के इस फैसले को देश के रणनीतिक हितों के खिलाफ बताया है। उनका तर्क है कि हाल ही में 13 अक्टूबर को हुई BIMSTEC होम मिनिस्टर्स की बैठक और सितंबर में हुए BRICS आउटरीच सत्र से बांग्लादेश का नदारद रहना एक अपरिपक्व कदम है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
इन्वेस्टर और बिजनेस लीडर्स इस घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच पावर एक्सपोर्ट, टेक्सटाइल सप्लाई चेन और कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े गहरे आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में जब हाई-लेवल कम्युनिकेशन चैनल बंद होते हैं, तो नीतिगत फैसलों की गति धीमी हो सकती है और ट्रेड संबंधी विवादों का समाधान मुश्किल हो जाता है।
Hasina का स्पष्ट मानना है कि राजनीतिक मतभेदों को क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के आड़े नहीं आना चाहिए। अब बाजार और विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच भविष्य में संवाद के रास्ते फिर से खुल पाएंगे या यह तनाव व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई चुनौती बनेगा।
