UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 2025 के बॉर्डर विवाद को सुलझाने का श्रेय Donald Trump को दिया है। भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव और Indus Waters Treaty का भविष्य अब निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच का उपयोग करते हुए 2025 के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर विवाद पर अपनी बात रखी। Sharif ने दावा किया कि Pahalgam हमले और उसके बाद भारत द्वारा चलाए गए 'Operation Sindoor' के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत किया था।
आर्थिक और प्रशासनिक चिंताएं
दोनों देशों के बीच बिगड़ते कूटनीतिक संबंधों का सीधा असर Indus Waters Treaty पर पड़ा है। 2025 की घटनाओं के बाद से ही यह संधि निलंबित (abeyance) जैसी स्थिति में है। भारत ने सीमा पार की गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं, जिसका सीधा असर उत्तरी भारत की सिंचाई और जल प्रबंधन परियोजनाओं पर पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
निवेशकों के नजरिए से, क्षेत्रीय स्थिरता किसी भी देश में निवेश के जोखिम का सबसे बड़ा पैमाना होती है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार सीमित है, लेकिन तनाव बढ़ने का असर सीधे तौर पर डिफेंस एक्सपेंडिचर (रक्षा खर्च) और सीमावर्ती इलाकों की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर पड़ता है। इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां सरकार की सुरक्षा नीतियों और रिसोर्स एलोकेशन में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील रहती हैं।
भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे गलत बयानी करार दिया है और स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि आगे चलकर सीमा नीति और जल संधि को लेकर आधिकारिक बयान क्या आते हैं, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता ही लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता तय करेगी।
