United Liberation Council नाम के एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। इसमें उनकी संवेदनशील निजी जानकारी लीक करने का दावा किया गया है, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों की जांच में जुटी हैं। 27 अगस्त, 2026 को United Liberation Council (ULC) ने ये चेतावनियां जारी कीं, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही एक छद्म संगठन माना जा रहा है। बीते कुछ महीनों में इस तरह का यह चौथा मामला है, जो समुदाय को डराने की एक सुनियोजित साजिश को दर्शाता है।
डेटा लीक का गंभीर खतरा
हालिया धमकी इसलिए भी डराने वाली है क्योंकि इसमें कर्मचारियों के नाम, घर का पता और गाड़ी की डिटेल्स जैसे संवेदनशील निजी डेटा को सार्वजनिक करने का दावा किया गया है। इन धमकियों का मकसद कश्मीरी पंडितों को 1990 के दशक के पलायन से जुड़े कानूनी मामलों से पीछे हटने और सरकारी कामकाज में सहयोग बंद करने के लिए मजबूर करना है।
प्रशासन का एक्शन प्लान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लीक हुए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसमें संदिग्ध इलाकों में निगरानी बढ़ाने और कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है ताकि सार्वजनिक स्थानों पर जोखिम को कम किया जा सके। फिलहाल, सुरक्षा बल धमकियों के स्रोत का पता लगाने और प्रभावित डेटा को सुरक्षित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।
