हूती (Houthi) विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बाद Turkey ने Mecca Joint Defence Agreement के तहत Saudi Arabia को तकनीकी सैन्य मदद देने का ऐलान किया है। इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है, जिसका असर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और रेड सी (Red Sea) के शिपिंग रूट्स पर पड़ सकता है।
सैन्य मदद का क्या है आधार?
तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने पुष्टि की है कि अंकारा, सऊदी अरब को तकनीकी सैन्य सहायता देने के लिए तैयार है। यह कदम हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद के पास संवेदनशील एनर्जी ठिकानों पर किए जा रहे लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद उठाया गया है।
यह समझौता 'मेक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (Mecca Joint Defence Agreement) का हिस्सा है, जिसमें Turkey, Saudi Arabia और Pakistan शामिल हैं। इस समझौते का सुरक्षा फ्रेमवर्क यह है कि एक सदस्य पर हमला, पूरे समूह पर हमला माना जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों है चिंता का विषय?
भारतीय निवेशकों और ग्लोबल मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'रेड सी' (Red Sea) से जुड़ा है। यह रूट भारत के आयात-निर्यात, खासकर तेल और केमिकल शिपमेंट के लिए लाइफलाइन है। इस क्षेत्र में टकराव बढ़ने से शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम में उछाल आ सकता है और ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आगे क्या नजर रखें?
बाजार फिलहाल यह देख रहा है कि क्या यह रक्षात्मक कदम तनाव को कम करेगा या स्थिति को और उलझा देगा। NATO सदस्य होने के नाते Turkey की इस मामले में एंट्री ने भू-राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। अब निवेशकों की निगाहें ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन और जहाजों की आवाजाही पर टिकी हैं।
