जाने-माने इकोनॉमिस्ट जेफ्री सैक्स ने भारत और चीन से आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट से पहले, डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैश्विक शक्ति संतुलन पर उनकी टिप्पणियाँ काफी अहम मानी जा रही हैं।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने भारत और चीन के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका मानना है कि इन दो एशियाई महाशक्तियों के बीच बेहतर तालमेल एक स्थिर वैश्विक ढांचे के निर्माण के लिए अनिवार्य है। ये सुझाव ऐसे समय में आए हैं जब 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS समिट होने वाला है।
भू-राजनीतिक समीकरण और निवेश का रुख
सैक्स का तर्क है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा कड़वाहट का सीधा फायदा अमेरिका को मिल रहा है। उनके अनुसार, यदि भारत और चीन सहयोग को प्राथमिकता देते हैं, तो वे अमेरिकी दादागिरी को प्रभावी ढंग से संतुलित कर सकते हैं। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की बढ़ती भूमिका और इंटरनेशनल पावर डायनेमिक्स में बदलाव का संकेत है, जो भविष्य में फॉरेन कैपिटल फ्लो को प्रभावित कर सकता है।
डॉलर की निर्भरता पर संकट
जेफ्री सैक्स ने डॉलर के वैश्विक दबदबे पर भी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इसे एक भू-राजनीतिक हथियार करार दिया है। BRICS के सदस्य देश अब ऐसी पेमेंट सिस्टम विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे सदस्य राष्ट्र अपनी लोकल करेंसी में लेनदेन कर सकें। इसका उद्देश्य अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों के जोखिम और अमेरिकी मौद्रिक नीति (US Monetary Policy) के झटकों से बचना है।
भारत के सामने चुनौतियां
हालांकि यह विचार सुनने में काफी प्रभावी लगता है, लेकिन भारत के लिए स्थानीय मुद्रा में व्यापार करना चुनौतीपूर्ण है। चीन के साथ भारत का बड़ा ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) एक बड़ी बाधा है। इस असंतुलन को कवर करने के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच मजबूत समझौतों और लंबी अवधि की आर्थिक नीतियों की जरूरत होगी।
बाजार के जानकारों की नजर अब इस समिट पर है कि क्या वहां पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर या ट्रेड एग्रीमेंट्स को लेकर कोई ठोस फैसला लिया जाता है।
