बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर बड़ा फैसला लिया गया है। भारत के नजरिए से यह समिट रीजनल स्टेबिलिटी और ट्रेड कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम है।
हाल ही में बिश्केक में संपन्न हुए 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में सदस्य देशों ने रीजनल सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक को-ऑपरेशन पर चर्चा की। संगठन की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने 'बिश्केक डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही, 2030 तक लॉजिस्टिक्स, ग्रीन टेक्नोलॉजी और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने के लिए 28 दस्तावेजों पर सहमति बनी है।
भारतीय बाजार के लिए संकेत
भारतीय निवेशकों के लिए इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रीजनल स्टेबिलिटी है। यूरेशियाई क्षेत्र में व्यापारिक रास्तों का सुरक्षित होना कच्चा माल (Raw Material) और सामान के आसान आवागमन के लिए जरूरी है। भारत का जोर इस बात पर है कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान हो, ताकि लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स में रिस्क कम रहे।
आतंक पर सख्त रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने समिट में दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक सुरक्षा खतरों से निपटने में 'डबल स्टैंडर्ड' को खत्म करना होगा। सुरक्षा का यह मुद्दा सीधे तौर पर सप्लाई चेन और इकोनॉमिक एक्टिविटी से जुड़ा है। ड्रग ट्रैफिकिंग और उग्रवाद जैसी चुनौतियों को नियंत्रित करना भारत के सस्टेनेबल ग्रोथ के लक्ष्य का हिस्सा है।
'मल्टी-अलाइनमेंट' रणनीति
भारत SCO के जरिए अपने क्षेत्रीय हितों को साध रहा है, जबकि साथ ही 'Quad' जैसे मंचों के जरिए पश्चिमी देशों के साथ भी जुड़ा हुआ है। यह 'मल्टी-अलाइनमेंट' अप्रोच भारत को किसी एक पावर ब्लॉक पर निर्भर होने से बचाती है, जो ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बदलावों के बीच निवेशकों के लिए एक सुरक्षित कवच का काम करता है।
आगे चलकर, ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर लिए गए फैसलों का इंप्लीमेंटेशन यह तय करेगा कि रीजनल इकोनॉमिक इंटीग्रेशन किस दिशा में जाता है।
