बिश्केक में आयोजित 26वें SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। साथ ही, भारत और उज्बेकिस्तान ने साल **2030** तक **$5 अरब** का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य तय किया है, जो एनर्जी सिक्योरिटी और रीजनल ट्रेड के लिहाज से अहम है।
बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
भारतीय निवेशकों के लिए यह कूटनीतिक रुख बेहद अहम है क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता सीधे तौर पर एनर्जी प्राइसेस, सप्लाई चेन और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड रूट्स को प्रभावित करती है। सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की सख्ती देश की इकोनॉमिक प्लानिंग के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है।
उज्बेकिस्तान के साथ नई पार्टनरशिप
समिट के इतर भारत और उज्बेकिस्तान ने एक व्यापक स्ट्रैटेजिक साझेदारी की है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $5 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यूरेनियम सप्लाई का नया फ्रेमवर्क है, जो भारत के सिविल न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। ऊर्जा क्षेत्र में भारत अपनी निर्भरता कम करने के लिए लंबे समय से ऐसे फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट्स की तलाश में था।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी
प्रधानमंत्री ने कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर चर्चा के दौरान सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान की बात कही। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और माइनिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की नजरें अब इस बात पर टिकी होंगी कि कैसे ये 11 समझौते जमीन पर उतरते हैं। यदि यूरेनियम सप्लाई का फ्रेमवर्क सफल होता है, तो पावर सेक्टर में लागत के स्थिर होने की उम्मीद बढ़ जाएगी, जिससे निवेशकों को भविष्य में एक स्पष्ट रोडमैप मिल सकेगा।
