बिश्केक में आयोजित SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत की आलोचना की है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इस संधि को फिलहाल निलंबित रखने के फैसले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, जो रीजनल जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता को बढ़ा रहा है।
पानी पर छिड़ा 'डिप्लोमैटिक' विवाद
बिश्केक में 1 सितंबर 2026 को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने पानी को इस क्षेत्र की 'लाइफब्लड' बताते हुए चेतावनी दी कि साझा संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
यह तनाव अप्रैल 2025 में उस घटना के बाद बढ़ा, जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 1960 की जल-बंटवारा संधि को निलंबित (Abeyance) करने का निर्णय लिया था। भारत ने परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) के उस फैसले को भी सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें संधि को कानूनी रूप से बाध्यकारी बताया गया था। भारत का स्पष्ट रुख है कि कोर्ट के पास संप्रभु निर्णयों में दखल देने का अधिकार नहीं है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क और निवेशकों पर असर
क्षेत्रीय निवेशकों के लिए यह कूटनीतिक गतिरोध लंबे समय से अनिश्चितता का कारण बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार सीमित है, लेकिन पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों पर तनातनी क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा व्यय (Defense Expenditure) पर असर डाल सकती है।
शहबाज शरीफ ने समिट के दौरान 2026-27 के लिए SCO काउंसिल की अध्यक्षता मिलने पर कनेक्टिविटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने विजन को साझा किया। उन्होंने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
फिलहाल, पानी के मुद्दे पर किसी समाधान की उम्मीद कम है। जैसे-जैसे दोनों देश अपने रुख पर अडिग हैं, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर डिप्लोमैटिक तनातनी का असर क्रॉस-बॉर्डर इकोनॉमिक सेंटिमेंट पर पड़ना तय है। अब निवेशकों की नजर इस्लामाबाद में होने वाले आगामी SCO लीडरशिप ट्रांजिशन पर टिकी है कि वहां कूटनीतिक बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
