बिश्केक में आयोजित 26वें SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। भारत अब BRI के बजाय चाबहार पोर्ट और INSTC जैसे वैकल्पिक ट्रेड रूट्स पर जोर दे रहा है, जो भारतीय सप्लाई चेन और एनर्जी सिक्योरिटी के लिए अहम हैं।
बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के तीन मुख्य स्तंभों पर भारत की रणनीति रखी। पीएम ने जोर दिया कि कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट संबंधित देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने वाला होना चाहिए। भारत का यह रुख चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और खास तौर पर 'चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर' (CPEC) के खिलाफ एक बड़ा कूटनीतिक और रणनीतिक कदम है।
वैकल्पिक ट्रेड रूट्स पर फोकस
भारत अब BRI के बजाय उन फ्रेमवर्क्स को प्राथमिकता दे रहा है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ईरान के चाबहार पोर्ट और 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) की अहमियत को रेखांकित किया। भारतीय निवेशकों और एक्सपोर्टर्स के लिए ये प्रोजेक्ट्स गेम-चेंजर हो सकते हैं, क्योंकि ये सेंट्रल एशिया और रूस तक पहुंचने के लिए नए लॉजिस्टिक रास्ते खोलते हैं, जिससे पारंपरिक बाधाओं से बचा जा सकेगा। यदि ये कॉरिडोर सही तरीके से विकसित होते हैं, तो लंबी अवधि में ट्रांजिट कॉस्ट कम हो सकती है और ट्रेड में स्थिरता आएगी।
एनर्जी सिक्योरिटी और महंगाई का कनेक्शन
समिट में ग्लोबल अस्थिरता, विशेष रूप से वेस्ट एशिया के संकट पर भी चर्चा हुई। 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) भारत की एनर्जी सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण चोक-पॉइंट है। इस रास्ते में किसी भी तरह की हलचल सीधे भारत के क्रूड ऑयल और गैस इंपोर्ट बिल को प्रभावित करती है, जिसका असर डोमेस्टिक महंगाई पर पड़ना तय है। ऐसे में, सरकार का कूटनीतिक जोर केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एनर्जी की कीमतों को मैनेज करने और मैन्युफैक्चरिंग जैसे एनर्जी-इंटेंसिव सेक्टर के मुनाफे (Profit Margins) को सुरक्षित रखने की एक आर्थिक मजबूरी भी है।
