2 अक्टूबर, 2026 को कीव और रूस के वोल्गोग्राद में हुए भीषण ड्रोन हमलों से एनर्जी सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा गया है। Lukoil की रिफाइनरी में लगी आग से क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका है, जो भारत के महंगाई के आंकड़ों पर असर डाल सकता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर है। 2 अक्टूबर, 2026 को दोनों देशों ने एक-दूसरे के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। कीव में हुए हमलों के कारण 'साउदर्न ब्रिज' (Pivdennyi Bridge) को बंद करना पड़ा और एक 25-मंजिला इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है।
रूस की रिफाइनरी पर अटैक
जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन ने रूस के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन चलाया। वोल्गोग्राद क्षेत्र में Lukoil की रिफाइनरी और Kaustik केमिकल प्लांट के पास भीषण आग की सूचना मिली है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रात भर में 14 क्षेत्रों में सैकड़ों ड्रोन को मार गिराया गया, लेकिन औद्योगिक केंद्रों पर हुए हमलों ने एनर्जी सेक्टर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद स्वीकार किया है कि रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे इन हमलों से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, जिससे जीडीपी में 1% की गिरावट आई है। यह घटनाक्रम ग्लोबल कमोडिटी मार्केट के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारक बन गया है।
भारत के नजरिए से देखें, तो हम कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं। यदि वैश्विक स्तर पर रिफाइनरी ऑपरेशंस प्रभावित होते हैं, तो फ्यूल प्राइसेज में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई पर पड़ना तय है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब सप्लाई कॉरिडोर्स और रिफाइनरी शटडाउन पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यही फैक्टर ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशन तय करेंगे।
