रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और भी गहरा गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के प्रमुख टेलिकॉम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
हमलों का दायरा और असर
रूसी सेना ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण टेलिकॉम और डेटा स्टोरेज ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है, जिसमें Kyivstar का हेडक्वार्टर और Vodafone के प्रमुख डेटा सेंटर्स शामिल हैं। इसके अलावा, क्रासिलोव्का स्थित Zammler Group के लॉजिस्टिक सेंटर और ओडेसा व मायकोलाइव के नौसैनिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। इन हमलों का मकसद यूक्रेन की सप्लाई लाइनों को पूरी तरह से ठप करना बताया जा रहा है।
भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल (Crude Oil) के तौर पर आयात करता है। जब भी युद्ध में ऊर्जा संयंत्रों या रिफाइनरियों (जैसे रूस की नोवोशाख्तिन्स्क फैसिलिटी) को निशाना बनाया जाता है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखने को मिलती है। यह अनिश्चितता सीधे तौर पर घरेलू महंगाई (Inflation) और इम्पोर्ट कॉस्ट पर दबाव डालती है।
सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा
लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाहों पर हमलों से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। खाद्यान्न और अन्य कमोडिटीज के शिपिंग इंश्योरेंस और फ्रेट कॉस्ट में बढ़ोतरी की आशंका है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कच्चे तेल के बेंचमार्क और शिपिंग कॉस्ट इंडेक्स पर नजर रखें, क्योंकि इनका असर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के निवेश पर पड़ सकता है।
