रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। 7 अक्टूबर 2026 को रूस ने यूक्रेन पर **70** मिसाइल और **130** ड्रोन से बड़ा हमला किया है, जिसका सीधा असर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और क्रूड ऑयल कीमतों पर पड़ सकता है।
युद्ध का नया और खूंखार मोड़
7 अक्टूबर 2026 को रूस द्वारा किए गए इस बड़े हवाई हमले ने यूक्रेन के कई इलाकों को दहला दिया है। यूक्रेन की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने 161 हवाई लक्ष्यों को मार गिराया, लेकिन हमलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ा है। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि उनके पास अमेरिका से मिले पैट्रियट सिस्टम के लिए एम्युनिशन की भारी किल्लत हो रही है, जिससे बुनियादी ढांचों को बचाना मुश्किल हो रहा है।
एनर्जी मार्केट पर क्या होगा असर?
इस हमले की सबसे बड़ी चिंता एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर है। दोनों देश अब एक-दूसरे की ऑयल रिफाइनरी और स्टोरेज डिपो को निशाना बना रहे हैं। यह 'टिट-फॉर-टैट' यानी 'जैसे को तैसा' वाली स्थिति ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में कोई भी बड़ा उछाल भारत में महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकता है और सरकारी खजाने पर इम्पोर्ट बिल का बोझ डाल सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल एनर्जी सेक्टर और कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह स्थिति बाजार के सेंटिमेंट को सीधे प्रभावित कर सकती है।
