Russia-Ukraine War: फिर गरमाया तनाव, ग्लोबल मार्केट में बढ़ सकती है हलचल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Russia-Ukraine War: फिर गरमाया तनाव, ग्लोबल मार्केट में बढ़ सकती है हलचल

रूस और यूक्रेन के बीच फिर से बढ़े तनाव और हवाई हमलों ने ग्लोबल मार्केट्स की चिंता बढ़ा दी है। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical risk) का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ने की आशंका है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क हो सकता है।

रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण एक बार फिर ग्लोबल मार्केट अनिश्चितता के दौर में है। हाल ही में दोनों देशों की ओर से हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने कीव और सुमी जैसे प्रमुख इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशन्स (UN) के मंच पर चल रही रूस और जर्मनी के बीच की राजनयिक बातचीत भी बिना किसी ठोस नतीजे के बेनतीजा रही है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?

भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात (Import) पर निर्भर हैं, यह संघर्ष बड़ी चुनौती बन सकता है। रूस एनर्जी और रॉ मैटेरियल्स का प्रमुख सप्लायर है। अगर युद्ध के कारण क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी आती है, तो इसका सीधा असर एविएशन, पेंट्स और केमिकल सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।

सप्लाई चेन और महंगाई का डर

यह इलाका गेहूं और सनफ्लावर ऑयल के निर्यात के लिए भी एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर है। युद्ध की वजह से सप्लाई चेन में बाधा आने से ग्लोबल फूड इन्फ्लेशन बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। अगर इनपुट कॉस्ट लगातार ऊंची बनी रहती है, तो आने वाले समय में ग्लोबल सेंट्रल बैंकों की इंटरेस्ट रेट पॉलिसी पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल, निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और कमोडिटी इंडेक्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही, उन भारतीय कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर ध्यान दें, जिनका एक्सपोर्ट-इंपोर्ट एक्सपोजर यूरोप से ज्यादा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.