संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में विस्तार को लेकर बड़ा झटका लगा है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस जर्मनी और जापान को परमानेंट सीट नहीं देने वाला है, साथ ही यूक्रेन मुद्दे पर जर्मनी की शांति कोशिशों को भी पूरी तरह नकार दिया है।
कूटनीतिक गतिरोध और रूस का सख्त रुख
न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मॉस्को अपनी वर्तमान सुरक्षा नीति से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने न केवल जर्मनी और जापान की UNSC सदस्यता की दावेदारी को खारिज किया, बल्कि यूक्रेन संघर्ष पर जर्मन अधिकारियों की ओर से दी गई शांति संबंधी अपीलों को भी खारिज कर दिया। यह घटनाक्रम रूस और G7 देशों के बीच बढ़ती खाई को साफ दर्शाता है।
बाजार पर असर और निवेशकों के लिए संकेत
दुनिया भर के मार्केट के लिए यह तनाव आर्थिक अनिश्चितता की एक बड़ी वजह बना हुआ है। बड़ी वैश्विक शक्तियों के बीच इस तरह की खींचतान का सीधा असर कमोडिटी प्राइसेस (Commodity Prices) पर पड़ता है, खासकर एनर्जी सेक्टर में। अनिश्चितता के कारण पैदा होने वाली इस अस्थिरता का असर सीधे महंगाई और भारत जैसे देशों के इंपोर्ट कॉस्ट (Import Cost) पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए चुनौतियां
रूस का यह रुख उसके BRICS में बढ़ते प्रभाव को और मजबूत करता है। भारत, जो अपनी कूटनीतिक संतुलन बनाने की नीति पर चल रहा है, उसके लिए अब आने वाले दिनों में ग्लोबल ट्रेड फ्लो (Global Trade Flow) और आर्थिक नीतियों पर बारीक नजर रखना जरूरी हो गया है। यूक्रेन संघर्ष का कोई समाधान न निकलने के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन और शिपिंग रूट्स पर बना दबाव अभी भी जारी है, जो निवेशकों की चिंताएं बढ़ा सकता है।
