रूस ने बशर अल-असद के प्रत्यर्पण की सीरिया की मांग को ठुकरा दिया है। दमिश्क कोर्ट द्वारा मौत की सजा के बावजूद रूस ने उन्हें शरण देने का फैसला बरकरार रखा है। हालांकि, दोनों देश अपने सैन्य बेस को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए एक अहम अपडेट है।
रूस ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि वह सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को प्रत्यर्पित नहीं करेगा। रूसी उप-विदेश मंत्री जॉर्जी बोरिसेंको ने कहा है कि मानवीय आधार पर दी गई शरण का फैसला अंतिम है। यह कदम 11 अगस्त, 2026 को दमिश्क की एक अदालत द्वारा असद को हत्या और अत्याचार के मामलों में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उठाया गया है।
कूटनीतिक तनाव और भविष्य की राह
इस फैसले ने मास्को और सीरिया के नए प्रशासन, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति अहमद अल-शरा कर रहे हैं, के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि, दोनों सरकारों के बीच बातचीत जारी है और सीरियाई राष्ट्रपति सत्ता परिवर्तन के बाद से 2 बार मास्को का दौरा कर चुके हैं, जिससे संकेत मिलता है कि वे विवाद के बावजूद अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सामरिक बेस पर क्या हो रहा है?
निवेशकों की नजर इस बात पर है कि रूस अपने हेमीम (Hmeimim) और टार्टस (Tartus) स्थित सैन्य ठिकानों का क्या करेगा। इन ठिकानों को जॉइंट ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स सेंटर में बदलने के लिए बातचीत चल रही है। 2026 के अंत तक दोनों देशों को इन समझौतों को अंतिम रूप देना है।
बाजार पर असर
सीरिया में स्थिरता का सीधा संबंध ग्लोबल एनर्जी मार्केट और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा से है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम पर पड़ सकता है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए संवेदनशील विषय है। निवेशकों को साल के अंत तक इन सैन्य समझौतों पर होने वाली प्रोग्रेस पर नजर रखनी चाहिए।
