रूस ने कीव और ओडेसा को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस हमले में यूक्रेन के पावर ग्रिड और लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया गया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन और एनर्जी मार्केट पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
हमलों की नई रणनीति
रूस ने अपनी सैन्य रणनीति को बदलते हुए यूक्रेन की राजधानी कीव और बंदरगाह शहर ओडेसा पर समन्वित रात के हमले किए हैं। इन ऑपरेशंस में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ एडवांस्ड जेट-पावर्ड ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया है, जो यूक्रेन की डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं। यूक्रेन की डिफेंस यूनिट्स, खासकर Patriot सिस्टम्स, इस समय सीमित इन्वेंट्री के साथ काम कर रही हैं।
पावर ग्रिड और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इन ऑपरेशंस का मुख्य लक्ष्य यूक्रेन का सैन्य और लॉजिस्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर रहा है। डेटा प्रोसेसिंग सेंटर, इलेक्ट्रिक सबस्टेशन और ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को टारगेट किया गया है। ओडेसा में आम नागरिकों के रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक परिवहन केंद्रों को भी भारी नुकसान हुआ है। सर्दियों के मौसम से ठीक पहले पावर ग्रिड्स को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति है ताकि यूक्रेन की ऑपरेशंस क्षमता को खत्म किया जा सके।
ग्लोबल मार्केट पर असर
यह जंग अब 'इंडस्ट्रियल एट्रिशन' (Industrial Attrition) की ओर बढ़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 18,000 नॉर्थ कोरियन सैनिकों की मौजूदगी और यूक्रेन द्वारा रशियन ऑयल रिफाइनरी साइटों पर जवाबी हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
ग्लोबल इकोनॉमी के नजरिए से देखें तो यह तनाव क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के बाजारों में हलचल मचा सकता है। सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में महंगाई का दबाव (Inflationary Pressure) देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल एनर्जी मार्केट की अस्थिरता और सप्लाई चेन की स्थिरता पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
