Riyadh में हुए हाई-लेवल समिट में Pakistan, Saudi Arabia और Turkiye ने 'Makkah Joint Defence Agreement' को लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। यह गठबंधन मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा बदलाव है।
सुरक्षा का नया समीकरण
Riyadh में हुई इस बैठक में शामिल हुए दिग्गज नेताओं ने 'Strategic Political and Defence Committee' (SPDC) के तहत अपनी सुरक्षा साझेदारी को औपचारिक रूप दे दिया है। 7 अगस्त, 2026 को साइन किए गए 'Makkah Joint Defence Agreement' का मुख्य उद्देश्य हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा करना है।
क्या है भारत के लिए रिस्क?
निवेशकों और भारतीय मार्केट के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि भारत अपनी क्रूड ऑयल की जरूरतों के लिए सऊदी अरब पर काफी निर्भर है। इस नए गठबंधन के चलते अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या सप्लाई चेन में दिक्कत आती है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के इंपोर्ट बिल, महंगाई और एविएशन व केमिकल जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है।
गठबंधन की मजबूती
यह कोई अस्थायी फैसला नहीं है। इस गठबंधन को स्थाई ढांचा देने के लिए पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल Nauman Mahmood को इसका पहला सेक्रेटरी-जनरल नियुक्त किया गया है। नियम के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी पर भी हमला तीनों पर हमला माना जाएगा, जो इस क्षेत्र में एक बड़ा 'डिटेरेंट' साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या यह कदम क्षेत्र में शांति लाएगा या भू-राजनीतिक तनाव को और हवा देगा।
