Red Sea Crisis: हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमले और पाइपलाइन ठप होने से उबलने लगा Crude Oil

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AuthorMehul Desai|Published at:
Red Sea Crisis: हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमले और पाइपलाइन ठप होने से उबलने लगा Crude Oil

हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर लिया है और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद कामकाज पूरी तरह बंद है। इस दोहरी मार से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है और Brent Crude के भाव में **3-4%** का उछाल आया है। भारत के लिए यह तनाव घरेलू ईंधन कीमतों और महंगाई के मोर्चे पर बड़ा जोखिम खड़ा कर रहा है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सुरक्षा तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। हूती बलों ने बाब अल-मंडेब के पास मोखा पोर्ट और पेरिम व हनिश आइलैंड्स जैसे रणनीतिक ठिकानों पर अपना नियंत्रण बना लिया है। यह समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच होने वाले ट्रेड के लिए बेहद अहम माना जाता है।

सऊदी पाइपलाइन पर संकट

इस तनाव ने सऊदी अरब के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है। 10 सितंबर, 2026 को ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन के नाम से जाना जाता है, को बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को रेड सी टर्मिनल्स तक ले जाने के लिए मुख्य जरिया है। अनुमान के मुताबिक, इसे ठीक होने में 3 से 5 हफ्ते का समय लग सकता है, जिससे देश के पास तेल निर्यात के विकल्प बहुत सीमित हो गए हैं।

ग्लोबल मार्केट पर असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और रेड सी, दोनों ही प्रमुख मार्गों पर बढ़ते दबाव के कारण बाजार में सप्लाई को लेकर डर बना हुआ है। मार्केट जानकारों का मानना है कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई में 4% तक की कमी आ सकती है। इसी डर के चलते 14 सितंबर, 2026 तक Brent Crude की कीमतें 3-4% बढ़ गई हैं। गठबंधन की आंतरिक कलह और यमन में बढ़ते पावर वैक्यूम ने हूती विद्रोहियों को पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक होने का मौका दे दिया है।

भारत के लिए संकेत

भारत के लिए यह जियोपॉलिटिकल टेंशन एक बड़े अलर्ट की तरह है। एक बड़ा क्रूड इंपोर्टर होने के नाते, ऑयल प्राइसेज में अस्थिरता का सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल, ट्रेड बैलेंस और रुपये की वैल्यू पर पड़ता है। लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से देश में महंगाई (Inflation) का दबाव भी बढ़ सकता है। हालांकि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में यह अचानक आई बाधा मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए चिंता का विषय है। निवेशकों को अब पेट्रोलाइन की मरम्मत के अपडेट्स और कूटनीतिक बातचीत के पुन: शुरू होने पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.