भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के Quad शेरपा दिल्ली में एक अहम बैठक के लिए जुटे हैं। निवेशकों के लिए यह बैठक इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे डिफेंस, टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सेक्टर में भविष्य की नई राहें खुल सकती हैं।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी की मेजबानी में दिल्ली में Quad देशों के शेरपाओं ने एक अहम रणनीतिक बैठक की है। यह मीटिंग दिसंबर 2026 में होने वाले G20 लीडर्स समिट से पहले के राजनयिक कैलेंडर की शुरुआत है। हालांकि यह बैठक पर्दे के पीछे होती है, लेकिन इसके नतीजे डिफेंस, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन रेजिलिएंस जैसे अहम मुद्दों को तय करेंगे।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारतीय निवेशकों की नजर इस बैठक पर इसलिए है क्योंकि इन चार देशों का आपसी तालमेल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में नई डील और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का रास्ता साफ करता है। क्रिटिकल मिनरल्स पर साझेदारी सीधे तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में काम कर रही कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म सप्लाई चेन सिक्योरिटी सुनिश्चित करने का काम करेगी।
आगे की चुनौतियां
यह बैठक आने वाले समय में होने वाली हाई-लेवल और मिनिस्ट्रियल लेवल की चर्चाओं की नींव है। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की अक्टूबर में होने वाली संभावित यात्रा को भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव और एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी अनिश्चितताएं इन पहलों की गति पर असर डाल सकती हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि अब निवेशकों को आने वाली मिनिस्ट्रियल मीटिंग्स और G20 के अंतिम निर्णयों पर बारीक नजर रखनी चाहिए, खासकर ट्रेड स्टैंडर्ड्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फैसलों पर।
