Qatar ने इजरायल के हालिया आम चुनाव में फंड भेजने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इजरायल में सुरक्षा जांच शुरू होने के साथ ही राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे मिडिल ईस्ट के हालात पर वैश्विक बाजारों की नजर है।
आरोपों पर कतर का रुख
कतर के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर उन दावों को सिरे से खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि दोहा इजरायल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये आरोप केवल ध्यान भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं ताकि इजरायल की आंतरिक राजनीतिक विफलताओं को छिपाया जा सके। यह स्पष्टीकरण इजरायल की खुफिया एजेंसी Shin Bet द्वारा जांच शुरू करने के बाद आया है, जो इस बात का पता लगा रही है कि क्या अरब-इजरायली वोटिंग क्षेत्रों में विदेशी पैसा भेजा गया था।
राजनीतिक गतिरोध (Parliamentary Gridlock)
इजरायल में चुनावी नतीजे आने के बाद भी राजनीतिक स्थिति धुंधली है। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का जादुई आंकड़ा जरूरी है, जिसे फिलहाल कोई भी गुट हासिल नहीं कर पाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन 53 से 54 सीटों पर है, जबकि विपक्ष के गादी आइजनकोट के पास 48 सीटें हैं। अब 19 सीटें जीतने वाली अरब पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं।
बाजार पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए मिडिल ईस्ट के ये घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट, खासकर क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की कीमतों पर पड़ता है। क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक बाजारों में सावधानी का माहौल बनाती है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, सेंट्रल इलेक्शन कमेटी ने साफ कर दिया है कि जांच का असर नतीजों की घोषणा पर नहीं पड़ेगा और 4 नवंबर को आधिकारिक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग औपचारिक रूप से गठबंधन बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
