नई दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने दावा किया है कि **30,000** से ज्यादा इंटरनेशनल सैंक्शंस के बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। भारत और रूस ने अब **2030** तक सालाना **$100 बिलियन** के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है।
रूस की अर्थव्यवस्था पर पुतिन का स्टैंड
राष्ट्रपति Vladimir Putin ने व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि रूस को अलग-थलग करने की कोशिशें नाकाम रही हैं। उनके दावों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में रूस के इकोनॉमिक इंडिकेटर्स ने वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, उन्होंने पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना करते हुए इसे वैश्विक व्यापार में बाधा बताया।
भारत-रूस ट्रेड टारगेट: रोडमैप
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की तैयारी है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यह व्यापार लगभग $70 बिलियन रहा था, जिसे 2030 तक बढ़ाकर $100 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस साझेदारी की नींव कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर टिकी है, लेकिन अब एविएशन, परमाणु ऊर्जा, माइनिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सेक्टरों में भी सहयोग गहरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
जोखिम और सतर्कता (Investor's Radar)
बाजार के जानकारों का मानना है कि आधिकारिक बयानों के इतर, जमीन पर स्थितियां थोड़ी जटिल हैं। रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर साफ दिखता है। भारतीय कंपनियों के लिए चिंता का विषय यह है कि मॉस्को के साथ गहरे व्यापारिक संबंध रखने पर 'सेकेंडरी सैंक्शंस' का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी तनाव और ग्लोबल ऑयल प्राइस की अस्थिरता भी ट्रेड फ्लो को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या देखें?
BRICS समिट में वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (Alternative Payment Systems) पर चर्चा महत्वपूर्ण है। निवेशकों को उन अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय सेटलमेंट्स और ट्रेड एग्रीमेंट्स से संबंधित हैं। इन पेमेंट सिस्टम्स का विकास आने वाले समय में ग्लोबल ट्रेड की दिशा तय करेगा।
