रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनेट्स्क क्षेत्र में बड़े इलाके पर कब्जे का दावा किया है। उन्होंने यूक्रेन के साथ किसी भी सीधी बातचीत को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ गया है और क्रूड ऑयल व कमोडिटी मार्केट में उठापटक की आशंका है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए दावा किया है कि अगस्त 2026 के दौरान रूसी सेना ने डोनेट्स्क क्षेत्र के 270 वर्ग किलोमीटर इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। पुतिन ने स्पष्ट किया है कि मॉस्को वर्तमान यूक्रेनी नेतृत्व के साथ किसी भी सीधी बातचीत के पक्ष में नहीं है।
एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर गहराता संकट
मार्केट एक्सपर्ट्स के लिए सबसे बड़ी चिंता एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है। रूस ने संकेत दिया है कि यूक्रेन द्वारा रूसी जमीन पर किए जा रहे ड्रोन हमलों का बदला लेने के लिए वे बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि पुतिन ने माना कि उनके कुछ रिफाइनरीज को ड्रोन हमलों से नुकसान हुआ है, लेकिन उन्होंने इसे मामूली बताया है। फिर भी, ऊर्जा ग्रिड्स को लगातार निशाना बनाए जाने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर जोखिम बना हुआ है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति संवेदनशील है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है। यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और ट्रेड बैलेंस पर पड़ सकता है। निवेशक अब क्रूड ऑयल बेंचमार्क और कमोडिटी मार्केट पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं, क्योंकि सर्दी का मौसम आने के साथ ऊर्जा की मांग बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
