पाकिस्तान की Punjab Assembly ने एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें **16** साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है।
पाकिस्तान की पंजाब असेंबली ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। चाइल्ड प्रोटेक्शन ब्यूरो की चेयरपर्सन सारा अहमद द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद साइबर बुलिंग और बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को रोकना है। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक सुझाव है और इसे लागू करने का अंतिम फैसला संघीय सरकार के हाथ में है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती सख्ती
यह कोई अकेला मामला नहीं है। दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और अमेरिका के कई राज्यों में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र के वेरिफिकेशन (Age Verification) को लेकर कानून बनाने पर बहस चल रही है। सरकारें 'बिग टेक' कंपनियों पर नकेल कसने की कोशिश कर रही हैं ताकि बच्चों की प्राइवेसी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या भारतीय बाजार पर होगा असर?
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह घटनाक्रम पूरी तरह से पाकिस्तान की स्थानीय राजनीति से जुड़ा है। इसका भारतीय शेयर बाजार या लिस्टेड कंपनियों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ने वाला है। हालांकि, ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए दुनिया भर में बन रहे इस तरह के नियम भविष्य में उनके बिजनेस मॉडल और वैल्युएशन को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए ऐसे नीतिगत बदलावों पर नजर रखना जरूरी है।
अभी सरकार यह देखेगी कि बिना प्राइवेसी को दांव पर लगाए इस तरह की पाबंदी को तकनीकी रूप से लागू करना कितना संभव है।
