पोलैंड की स्पेशल फोर्सेज जर्मनी में एडवांस 'डीप-स्ट्राइक' ट्रेनिंग ले रही हैं, जो NATO की बदलती रणनीति का संकेत है। यह खबर पोलैंड के रिकॉर्ड रक्षा खर्च को दर्शाती है, जिससे यूरोप में हाई-टेक डिफेंस और सर्विलांस उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
जर्मनी में स्पेशल फोर्सेज की ट्रेनिंग
पोलैंड की स्पेशल फोर्सेज इस समय जर्मनी के होहेनफेल्स (Hohenfels) स्थित 'जॉइंट मल्टीनेशनल रेडिनेस सेंटर' में कठिन 'डीप-स्ट्राइक' ड्रिल कर रही हैं। अमेरिकी 'ग्रीन बेरेट्स' की निगरानी में हो रही यह ट्रेनिंग रूस-यूक्रेन युद्ध के सबक को आधार मानकर तैयार की गई है। इसमें ड्रोन वॉरफेयर और दुश्मन के इलाके में छिपकर किए जाने वाले ऑपरेशंस पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
डिफेंस सेक्टर में निवेश के अवसर
यह सैन्य अभ्यास पोलैंड की आक्रामक रक्षा नीति का ही हिस्सा है। वारसॉ (Warsaw) ने NATO देशों के बीच सबसे ज्यादा डिफेंस स्पेंडिंग (Defense Spending) करने वाले देशों में अपनी जगह बना ली है। पोलैंड का अपने GDP का एक बड़ा हिस्सा सैन्य हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के द्वार खोल रहा है। अब यूरोप के अन्य देश भी अपनी सैन्य क्षमताओं को अपग्रेड करने के लिए कतार में हैं।
बजट पर बढ़ता दबाव और रिस्क
हालांकि, रक्षा क्षेत्र का यह विस्तार केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, इसके साथ फाइनेंशियल रिस्क भी जुड़े हैं। बेतहाशा सैन्य खर्च के कारण पोलैंड के नेशनल बजट पर दबाव बढ़ रहा है और फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) भी चौड़ा हो रहा है। रेटिंग एजेंसियां और इकोनॉमिस्ट्स लगातार इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या पोलैंड अपनी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखते हुए इस लंबे समय तक चलने वाले मिलिट्री एक्सपेंडिचर प्रोग्राम को जारी रख पाएगा।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि भविष्य में ड्रोन-इंटीग्रेटेड सिस्टम्स और स्टेल्थ तकनीक की मांग बनी रहेगी। जो निवेशक डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर पर दांव लगा रहे हैं, उन्हें अब सरकारी प्रोक्योरमेंट अनाउंसमेंट्स और NATO के बजट अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
