पोलैंड में संवैधानिक संकट गंभीर हो गया है। सरकार ने शीर्ष जजों की कानूनी सुरक्षा (Immunity) खत्म करने का फैसला किया है, जिससे देश में भारी विरोध और राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री Donald Tusk और राष्ट्रपति Karol Nawrocki के बीच का यह टकराव यूरोपीय बाजारों में अस्थिरता का संकेत दे सकता है।
वारसॉ में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। न्याय मंत्री Waldemar Zurek द्वारा कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष Swieczkowski और उपाध्यक्ष Bartomiej Sochanski की इम्युनिटी खत्म करने के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया है। सरकार इन अधिकारियों पर नए जजों की नियुक्ति रोकने का आरोप लगाते हुए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की तैयारी कर रही है।
विरोध और सड़कों पर तनाव
इस कदम को ट्रिब्यूनल ने सीधे तौर पर 'तख्तापलट' (Coup d'etat) करार दिया है। राजधानी की सड़कों पर Law and Justice पार्टी के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें देखी गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति Karol Nawrocki को अपना सेनेगल का दौरा बीच में ही छोड़कर वारसॉ लौटना पड़ा।
क्यों ठनी है जंग?
यह विवाद न्यायिक स्वतंत्रता और पूर्व सरकार द्वारा किए गए सुधारों को वापस लेने की PM Tusk की मुहिम से जुड़ा है। राष्ट्रपति Nawrocki ने संसदीय समर्थित 5 उम्मीदवारों को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रिब्यूनल का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
आर्थिक दृष्टिकोण से, इस तरह के लंबे राजनीतिक गतिरोध विदेशी पूंजी के लिए अनिश्चितता पैदा करते हैं। हालांकि, इसका असर सीधे तौर पर किसी विशेष एसेट पर सीमित है, लेकिन यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में ऐसी राजनीतिक घर्षण क्षेत्रीय मुद्रा और रिस्क प्रीमियम को प्रभावित कर सकती है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या कोई कानूनी समझौता हो पाएगा या देश प्रशासनिक पंगुता की ओर बढ़ेगा।
