PoK चुनाव में धांधली के आरोप, PML-N जीती 9 सीटें

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PoK चुनाव में धांधली के आरोप, PML-N जीती 9 सीटें

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हुए चुनावों के नतीजे आ गए हैं, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 13 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि, इस चुनाव प्रक्रिया पर बड़े पैमाने पर धांधली और हिंसक टकराव के आरोप लगे हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है। भारत ने भी इस चुनावी कवायद की निंदा की है।

Detailed Coverage

PoK चुनाव: PML-N का दबदबा, पर आरोपों का साया

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चुनाव का पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 13 में से 9 सीटें जीतकर बाजी मारी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को बाकी 4 सीटें मिली हैं। लेकिन, नतीजों पर घमासान मचा हुआ है और व्यापक अशांति की खबरें सामने आ रही हैं।

धांधली के आरोप और राजनीतिक हंगामा

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सीधे तौर पर नतीजों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि PML-N के पक्ष में चुनावी प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की गई। नेताओं ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि धांधली की जांच पूरी होने तक अंतिम नतीजों के ऐलान पर रोक लगाई जाए। वहीं, सरकार के मंत्रियों ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए चुनाव को पारदर्शी बताया है और हिंसा को छिटपुट घटनाएं करार दिया है।

हिंसा का चुनावों पर असर

चुनाव प्रचार के दौरान हिंसक झड़पों की खबरें भी आईं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टकराव में कम से कम 1 व्यक्ति की मौत हुई और कई राजनीतिक कार्यकर्ता घायल हुए। इस बीच, स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में उनके 14 सदस्य मारे गए और 24 से अधिक घायल हुए। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पहले गोलीबारी शुरू की थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई।

भारत का कड़ा रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने PoK चुनावों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली ने इस पूरी कवायद को पाकिस्तान की मौजूदगी को वैध ठहराने का एक छलावा बताया है। भारत का कहना है कि यह सब क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन और अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश है। यह अशांति PoK में पिछले लगभग 2 महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और नागरिक अस्थिरता के बाद आई है, जिनका सामना सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई से हुआ है।

फिलहाल, निवेशक और विश्लेषक इस क्षेत्र में चुनाव के बाद की स्थिरता पर नजरें गड़ाए हुए हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या धांधली के अनसुलझे आरोप और JAAC जैसे समूहों के साथ जारी संघर्ष आगे और विरोध प्रदर्शनों, हड़तालों या कार्रवाई का रूप लेता है, जो क्षेत्र में सामान्य कामकाज को बाधित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.