U.S. Pentagon ने NATO सदस्य देशों से यूरोपीय सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालने को कहा है, ताकि अमेरिका का पूरा ध्यान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर केंद्रित हो सके। इस 'NATO 3.0' रणनीति के तहत बजट बढ़ाने और लॉजिस्टिकल एक्सेस की मांग की गई है, जिसकी अंतिम समीक्षा **6 नवंबर, 2026** तक पूरी होनी है।
ब्रसेल्स में 27 अगस्त, 2026 को U.S. अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर पॉलिसी Elbridge Colby ने NATO अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इसका मुख्य मकसद यूरोप की पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव लाना है। अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय देश अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लें, ताकि अमेरिकी संसाधनों को इंडो-पैसिफिक के मोर्चे पर तैनात किया जा सके।\n\n### डिफेंस सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?\n\nनिवेशकों के नजरिए से यह बदलाव काफी बड़ा है। यूरोपीय देशों को अब अपनी सैन्य तैयारियों, हथियारों के अपग्रेड और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ाना होगा। इससे उन डिफेंस कंपनियों के लिए ऑर्डर फ्लो में बढ़ोतरी की उम्मीद है जो यूरोप में टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट सप्लाई करती हैं।\n\n### अमेरिका की नई शर्तें\n\nवॉशिंगटन सिर्फ बजट ही नहीं, बल्कि अपने मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए यूरोपीय बेस और एयरस्पेस तक निर्बाध पहुंच (Unrestricted Access) की भी गारंटी चाहता है। इसका मकसद किसी भी अनिश्चितता की स्थिति में अमेरिका को तुरंत फैसले लेने की आजादी देना है।\n\n### रिस्क और आने वाली तारीख\n\nइस बड़े बदलाव में जोखिम भी कम नहीं हैं। यदि यूरोपीय देश अपनी क्षमता पूरी तरह विकसित करने से पहले ही अमेरिकी सेना की संख्या कम कर दी गई, तो एक 'सिक्योरिटी वैक्यूम' पैदा हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर 6 नवंबर, 2026 पर है, जो डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth द्वारा शुरू की गई 'Europe Posture Review' की डेडलाइन है। इसी दिन यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की भविष्य की तैनाती के लिए कम से कम 4 विकल्प पेश किए जाएंगे, जो ग्लोबल सिक्योरिटी मार्केट की दिशा तय करेंगे।
