US रक्षा विभाग में सैन्य हताहतों के आंकड़ों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ऑपरेशंस के डेटा में हेरफेर के आरोपों के बाद Defense Secretary Pete Hegseth पर महाभियोग (Impeachment) की तलवार लटक रही है, जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है।
आंकड़ों का बड़ा खेल और राजनीति
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन इस वक्त सवालों के घेरे में है। ईरान के साथ संघर्ष में हुए सैन्य नुकसान के आधिकारिक आंकड़ों में बड़ी विसंगतियां सामने आई हैं। पेंटागन का कहना है कि कुल 18 मौतें हुई हैं, जबकि बाहरी रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 22 से 23 के बीच बताया जा रहा है। इस भारी अंतर ने कानून निर्माताओं के बीच गुस्सा भर दिया है और अब एक औपचारिक ऑडिट की मांग तेज हो गई है।
Pete Hegseth पर चौतरफा दबाव
डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'दुष्प्रचार' (disinformation) करार दिया है। लेकिन विवाद थमने के बजाय बढ़ता जा रहा है। प्रतिनिधि Thomas Massie ने Hegseth के खिलाफ महाभियोग के लेख (articles of impeachment) पेश कर दिए हैं। उनका आरोप है कि ईरान और कैरेबियन क्षेत्र में सैन्य हमले बिना उचित अनुमति के किए गए थे। साथ ही, Representative Jason Crow के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक नेता अब ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे पेंटागन भविष्य में आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ न कर सके।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
ग्लोबल मार्केट और भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर सीधे तौर पर क्रूड ऑयल (Crude Oil) से जुड़ी है। ईरान ग्लोबल एनर्जी मार्केट का एक बड़ा खिलाड़ी है। जब भी US की सैन्य नीतियों में अस्थिरता आती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ता है। बाजार हमेशा 'पॉलिसी प्रेडिक्टेबिलिटी' पसंद करता है, लेकिन फिलहाल वाशिंगटन और पेंटागन के बीच की यह खींचतान निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब बाजार की नजरें पेंटागन के अगले रुख और महाभियोग की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
