पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तांडो अल्लाहयार की एक अदालत ने दो नाबालिग बहनों को सरकारी सेफ हाउस में रखने का आदेश दिया है। इन लड़कियों पर अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं, और कोर्ट के इस फैसले का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है।
तांडो अल्लाहयार, सिंध की अदालत ने काछी कोली समुदाय की 13 साल की सीता और 14 साल की रूपी को सरकारी सेफ हाउस में रखने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन आरोपों के बाद आया है जिनमें कहा गया है कि इन नाबालिगों का अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और उनकी मर्जी के खिलाफ शादी करवाई गई। कोर्ट के इस कदम को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश है।
कानून और विवाद का मुद्दा
कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि कोर्ट का यह निर्णय 'सिंध चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट 2013' का उल्लंघन है, जो प्रांत में विवाह के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करता है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि लड़कियों को उनके कानूनी अभिभावकों से दूर रखने से उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है और उन पर बाहरी दबाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना सिंध प्रांत में भील (Bheel) और मेघवार (Meghwar) जैसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के पैटर्न के रूप में देखी जा रही है। तांडो अल्लाहयार जिले में अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार इन क्षेत्रों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर चेतावनी जारी करते रहे हैं।
वर्तमान में, कोर्ट ने मामले में मेडिकल एज-डिटरमिनेशन रिपोर्ट आने तक लड़कियों को सेफ हाउस में रखने का फैसला सुनाया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या न्यायिक प्रणाली बाल संरक्षण कानूनों को बरकरार रख पाएगी या नहीं।
