Saudi Arabia पर Houthi विद्रोहियों के ताजा ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद, पाकिस्तान ने 'Makkah Joint Defense Agreement' को सक्रिय करने के संकेत दिए हैं। ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सुरक्षा समझौता और पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को पुष्टि की कि 'Makkah Joint Defense Agreement' को लागू किया जा सकता है। यह फैसला 8 सितंबर से 9 सितंबर 2026 के बीच Houthi विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों के बाद लिया गया है। इन हमलों में कम से कम 73 नागरिक घायल हुए हैं और देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया है।
क्या है मक्का सुरक्षा समझौता?
अगस्त 2026 में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए इस त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते में एक सामूहिक रक्षा क्लॉज शामिल है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी देशों पर माना जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी संभावित सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से रक्षात्मक (Defensive) होगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
मार्केट एक्सपर्ट्स के लिए सबसे बड़ी चिंता सऊदी अरब की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा है। सऊदी अरब दुनिया का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता है, और ऐसे हमलों से ग्लोबल कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी अस्थिरता आ सकती है। यदि सप्लाई चेन में व्यवधान आता है, तो एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों में महंगाई और शिपिंग लागत बढ़ने का सीधा खतरा है।
फिलहाल, रीजनल ऑब्जर्वर्स इस बात पर नज़र बनाए हुए हैं कि पाकिस्तान की यह सैन्य प्रतिबद्धता एक प्रभावी 'डिटेरेंट' के रूप में काम करेगी या फिर क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ाएगी। निवेशकों को अब सऊदी अरब की ओर से आने वाली जवाबी रणनीति और तेल उत्पादन पर पड़ने वाले असर पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
