Pakistan, Saudi Arabia और Türkiye ने हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए रियाद में आपातकालीन 'Strategic Political Defence Committee' की बैठक बुलाई है।
रियाद में मंथन का एजेंडा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन अब एक्टिव मोड में आ गया है। हूती बलों द्वारा सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषकर Taibah पावर स्टेशन को निशाना बनाने के बाद, तीनों देशों के विदेश मंत्री और सैन्य नेतृत्व रियाद में एक साझा सुरक्षा प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देंगे।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि इन समुद्री मार्गों या तेल संयंत्रों पर कोई बड़ा खतरा मंडराता है, तो ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आ सकता है। इसका सीधा दबाव भारत की तेल कंपनियों जैसे Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL के मार्जिन पर पड़ता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का जोखिम भी रहता है।
गठबंधन की मजबूती और चुनौतियां
अगस्त 2026 में हुए 'Makkah Joint Defence Agreement' के तहत, किसी भी एक देश पर हमले को पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा। इस मोर्चे को और मजबूत करने के लिए पाकिस्तान ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को पहला सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया है। हालांकि, ईरान के साथ बढ़ते कूटनीतिक तनाव और संसाधनों के तालमेल को लेकर विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि यह गठबंधन क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में कितना सफल होता है।
