Pakistan ने 'Mecca Joint Defense Agreement' के तहत Saudi Arabia को सैन्य मदद का वादा किया है। इस गठबंधन में Turkey भी शामिल है। इसका मुख्य मकसद Bab el-Mandeb Strait की सुरक्षा करना है, जहां से दुनिया का **12%** ट्रेड गुजरता है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर एनर्जी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अहम है।
गठबंधन का आधार
रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif ने पुष्टि की है कि 7 अगस्त को साइन किए गए इस समझौते के तहत Islamabad अब Saudi Arabia के हितों की रक्षा के लिए अपने सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल करेगा। यह एक 'Tripartite Alliance' है, जिसमें किसी भी एक देश पर हमले को पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा।
क्यों अहम है Bab el-Mandeb Strait?
यह इलाका Red Sea और Gulf of Aden को जोड़ता है। हाल के दिनों में Houthi विद्रोही गुटों ने यमन के Mokha पोर्ट पर अपना कंट्रोल बढ़ाया है, जिससे कमर्शियल शिपिंग और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा पैदा हो गया है। दुनिया का करीब 12% व्यापार इसी रूट से होता है, ऐसे में किसी भी प्रकार की नाकेबंदी से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल (Crude oil) और गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो:
- Freight Rates: शिपिंग का किराया बढ़ सकता है।
- Insurance: युद्ध के खतरे को देखते हुए 'War-risk insurance' प्रीमियम में उछाल आ सकता है।
- Oil Prices: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता (Volatility) पैदा हो सकती है।
हालांकि यह गठबंधन सुरक्षा के लिए है, लेकिन मिडिल ईस्ट का बदलता पावर डायनामिक्स निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल के भाव और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत पर नजर रखना जरूरी होगा।
