इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2025 में हुए Operation Sindoor में तबाह हुए सैन्य और आतंकी ठिकानों को पाकिस्तान फिर से खड़ा करने में जुट गया है। भारतीय निगरानी से बचने के लिए अब घने जंगलों और छिपकर काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
सितंबर 2026 के इंटेलिजेंस इनपुट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने Line of Control (LoC) के पास अपने सैन्य और आतंकी बुनियादी ढांचे को फिर से बनाने की कोशिश तेज कर दी है। मई 2025 में हुए चार दिन के संघर्ष, जिसे 'Operation Sindoor' का नाम दिया गया था, उसमें इन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। संघर्ष विराम के बाद कुछ महीनों की सुस्ती के बाद, अब Luni, Putwal और Taipu Post के इलाकों में निर्माण गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं।
ऑपरेशन का इतिहास और बैकग्राउंड
भारत ने 7 मई 2025 को Pahalgam में हुए आतंकी हमले के जवाब में यह ऑपरेशन लॉन्च किया था। इसका मुख्य मकसद Jaish-e-Mohammed और Lashkar-e-Taiba जैसे आतंकी संगठनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त करना था। भारतीय सेना की प्रिसिजन स्ट्राइक्स (Precision Strikes) ने इन शिविरों और सुरक्षा घेरों को बुरी तरह तबाह कर दिया था।
नई चाल: छिपने की रणनीति
भारत की मजबूत सर्विलांस (Surveillance) क्षमताओं को मात देने के लिए, पाकिस्तान अब बड़े केंद्रों के बजाय छोटे और बिखरे हुए यूनिट्स बना रहा है। इन नई साइट्स को घने जंगलों में बनाया जा रहा है ताकि सेटेलाइट इमेजिंग, थर्मल सेंसर और रडार से इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन जगहों पर अब मॉडर्न एंटी-ड्रोन सिस्टम और थर्मल सेंसर भी लगाए जा रहे हैं।
मार्केट और डिफेंस सेक्टर पर असर
डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है। हालांकि इसका किसी कंपनी के तिमाही नतीजों पर तुरंत असर नहीं दिखेगा, लेकिन बॉर्डर पर जारी इस तनाव से साफ है कि भारत का फोकस एडवांस्ड सर्विलांस, रडार सिस्टम और ड्रोन डिफेंस तकनीक पर बना रहेगा। आने वाले समय में सरकार का नेशनल सिक्योरिटी और बॉर्डर मॉडर्नाइजेशन के लिए होने वाला कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।
