पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा (KP) में गवर्नर शासन लागू कर दिया है, जिससे वहां की प्रांतीय सरकार निलंबित हो गई है। इस राजनीतिक उठापटक के कारण निवेशकों में घबराहट है और KSE-100 इंडेक्स **1,964 अंक** लुढ़क गया है।
बाजार में मची खलबली
11 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने की घोषणा की। संविधान के आर्टिकल 232 और 234 का हवाला देते हुए केंद्र ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने और उग्रवाद पर काबू न पाने का आरोप लगाया। इस कदम के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया और मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है।
इस राजनीतिक संकट का असर पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर तुरंत दिखा। KSE-100 इंडेक्स में 1,964 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आमतौर पर ऐसी राजनीतिक अनिश्चितता को नकारात्मक माना जाता है क्योंकि इससे भविष्य की आर्थिक नीतियों पर संशय पैदा होता है।
व्यापार और आर्थिक जोखिम
प्रांतीय नेतृत्व ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है, जिससे देश में बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की परियोजनाओं के लिए। किसी भी तरह की अशांति का असर लॉजिस्टिक्स और ट्रेड ऑपरेशन पर पड़ सकता है, जो पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
IMF और आर्थिक सुधारों का भविष्य
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या यह राजनीतिक खींचतान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा निर्धारित आर्थिक सुधारों को पटरी से उतार देगी? संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच तालमेल के बिना वित्तीय स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालती चुनौतियों और इमरजेंसी उपायों का आगे क्या असर होता है।
