पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने Khyber Pakhtunkhwa में इमरजेंसी लागू कर दी है और PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को भंग कर दिया है। राष्ट्रपति Asif Ali Zardari द्वारा अधिकृत इस फैसले के बाद क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल चरम पर है। फेडरल एडमिनिस्ट्रेशन ने संविधान के आर्टिकल 232 और 234 का इस्तेमाल करते हुए Khyber Pakhtunkhwa में गवर्नर शासन लगा दिया है। राष्ट्रपति Asif Ali Zardari की मंजूरी के बाद, राज्य में Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) की पूरी सरकार को हटा दिया गया है। सरकार का तर्क है कि प्रांत सुरक्षा बनाए रखने में नाकाम रहा और आतंकवाद विरोधी अभियानों से दूरी बना ली थी।
प्रशासन में बड़े बदलाव
इस दखल के बाद, ब्यूरोक्रेट Muhammad Fakhr Alam Irfan को नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है, जो अब प्रांत का कामकाज संभालेंगे। इस कदम से इस्लामाबाद और PTI के बीच तनाव और गहरा होने की आशंका है, जो पहले ही एक प्रमुख विपक्षी ताकत है।
आर्थिक और व्यापारिक जोखिम (Economic Impact)
बाजार के जानकारों के लिए सबसे बड़ी चिंता सिविल अनरेस्ट यानी नागरिक अशांति है। Khyber Pakhtunkhwa मध्य एशिया के साथ व्यापार का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर है। किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन या संस्थागत घर्षण लॉजिस्टिक्स और ट्रेड रूट को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान पहले ही IMF के कड़े फिस्कल टारगेट्स को पूरा करने के लिए जूझ रहा है। ऐसी राजनीतिक अस्थिरता से कंज्यूमर कॉन्फिडेंस पर बुरा असर पड़ना तय है।
PTI नेतृत्व ने चीफ मिनिस्टर Sohail Afridi और उनके कैबिनेट की बर्खास्तगी को अलोकतांत्रिक बताया है। अब सबकी नजर 13 अक्टूबर को होने वाली National Assembly की बैठक पर है, जहां इस इमरजेंसी की संवैधानिक वैधता पर बहस होगी। क्या यह फैसला सुरक्षा लक्ष्य हासिल करेगा या देश की पहले से ही कमजोर इकोनॉमी को और गहरे संकट में डालेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
