पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाकर **70 लाख PKR** कर दी है। अक्टूबर **2026** में होने वाली FATF प्लेनरी सेशन से ठीक पहले आए इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
रेड बुक में किया बदलाव
FIA ने अपनी 'रेड बुक' को अपडेट किया है, जिसमें अब 1,800 से ज्यादा वांछित लोगों के नाम शामिल हैं। मसूद अजहर पर इनाम की यह राशि 2021 के बाद से पहली बार बढ़ाई गई है।
FATF का दबाव और जियोपॉलिटिकल रिस्क
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अक्टूबर 2026 में FATF की अहम बैठक होने वाली है। हालांकि पाकिस्तान को 2022 में 'ग्रे लिस्ट' से बाहर निकाल दिया गया था, लेकिन वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में है। निवेशकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि FATF की रिपोर्ट किसी भी देश के 'सॉवरेन रिस्क प्रोफाइल' और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग को सीधे प्रभावित करती है, जिससे वहां की कैपिटल कॉस्ट (Cost of Capital) पर असर पड़ता है।
लोकेशन पर विवाद जारी
इस मामले में कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। जहां पाकिस्तान का दावा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान भाग गया है, वहीं भारतीय खुफिया एजेंसियां तकनीकी निगरानी के आधार पर उसे पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में बता रही हैं।
पारदर्शिता पर सवाल
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि FIA की इस अपडेटेड लिस्ट से 2008 मुंबई हमलों से जुड़े कुछ आतंकवादियों की तस्वीरें और विवरण हटा दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इसे जमीनी कार्रवाई के बजाय केवल एक 'प्रोसीजरल एक्सरसाइज' के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य में पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है।
