तेहरान में आयोजित एक सिक्योरिटी समिट के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir ने भारत और इजराइल की बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों पर सवाल उठाए हैं। इस भू-राजनीतिक बयानबाजी ने निवेशकों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और ट्रेड सेंटिमेंट को लेकर नई हलचल पैदा कर दी है।
तेहरान में 26 अक्टूबर, 2026 को हुई एक हाई-लेवल सिक्योरिटी मीटिंग में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल Asim Munir ने भारत और इजराइल के बीच गहरे होते रणनीतिक सहयोग पर गंभीर चिंता जाहिर की है। इस चार देशों के समिट में सऊदी अरब, तुर्की, ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे, जहाँ मुख्य रूप से क्षेत्रीय अस्थिरता और नई उभरती भू-राजनीतिक गठजोड़ पर चर्चा हुई।
बयानों के पीछे की राजनीति
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei के अनुसार, Munir ने नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच बढ़ते तालमेल को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। हालांकि ये बयान ईरानी सूत्रों के हवाले से आए हैं, लेकिन ये भारत-इजराइल के बीच चल रहे कूटनीतिक तालमेल के प्रति पाकिस्तान की असहजता को साफ दिखाते हैं।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
फरवरी 2026 में भारत और इजराइल के बीच 'Special Strategic Partnership for Peace, Innovation and Prosperity' की शुरुआत हुई थी, जिसमें डिफेंस, टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस शेयरिंग जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।
बाजार के नजरिए से देखें तो इस तरह की कूटनीतिक बयानबाजी का असर कई स्तरों पर पड़ता है:
- कमोडिटी मार्केट: भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है।
- ट्रेड रूट्स: पर्शियन गल्फ में शिपिंग सुरक्षा पर असर पड़ने से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर रहता है।
- इमर्जिंग मार्केट्स: हाई-प्रोफाइल सैन्य अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से क्षेत्रीय खतरों पर चर्चा करने से बाजार में 'रिस्क प्रीमियम' बढ़ जाता है, जो निवेशक सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल, मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बयानबाजी महज कूटनीतिक दबाव का हिस्सा है या फिर इससे सुरक्षा नीतियों में कोई बड़ा बदलाव आएगा।
