Pakistan ने एयरस्ट्राइक कर **22** आतंकियों को मारने का दावा किया है, जबकि तालिबान ने **9** नागरिकों की मौत की बात कही है। इस तनाव से सीमा पर व्यापार ठप होने और सप्लाई चेन बाधित होने का बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।
सैन्य कार्रवाई और दावों का दौर
पाकिस्तान की सुरक्षा बलों ने गुरुवार को अफगानिस्तान में Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इस्लामाबाद ने इस ऑपरेशन को 'Ghazab lil Haq' नाम दिया है और दावा किया है कि इसमें 22 आतंकी मारे गए हैं। वहीं, काबुल में अफगान तालिबान प्रशासन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये हमले कुनार और हेलमंद प्रांतों के रिहायशी इलाकों में हुए, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 9 नागरिकों की जान गई है।
बिजनेस और ट्रेड पर क्या होगा असर?
इस सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक स्थिरता को लेकर गंभीर अनिश्चितता खड़ी कर दी है। निवेशकों और कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा डर 'बॉर्डर क्लोजर' का है। इतिहास गवाह है कि जब भी दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा है, ट्रेड रूट्स को अचानक बंद कर दिया गया है, जिसका सीधा असर सप्लाई चेन और ट्रांजिट लॉजिस्टिक्स पर पड़ा है।
आर्थिक नुकसान का खतरा
सीमा विवाद के चलते पहले भी दोनों देशों के व्यापारियों को मिलियंस ऑफ डॉलर्स का नुकसान उठाना पड़ा है। जब भी बॉर्डर क्रॉसिंग सस्पेंड होती है, एक्सपोर्ट और ट्रांजिट के लिए जा रहे सामान बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट काफी बढ़ जाती है। यह स्थिति उन मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण है जो अफगान मार्केट की डिमांड और इस ट्रांजिट रूट पर निर्भर हैं।
फिलहाल, मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजरें बॉर्डर क्रॉसिंग की स्थिति और इस्लामाबाद व काबुल से आने वाले आधिकारिक बयानों पर टिकी हैं। किसी भी तरह की ट्रेड सस्पेंशन या लंबे समय तक बॉर्डर बंद रहने की खबर क्षेत्रीय वाणिज्य के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
