डूरंड लाइन पर हुई हिंसक झड़पों में **7** पाकिस्तानी जवानों की मौत के बाद दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। इस तनाव ने दक्षिण एशिया में लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़े आर्थिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
डूरंड लाइन पर सुरक्षा के हालात बेहद नाजुक हो गए हैं। पक्तिका प्रांत के दंड पाटन जिले में स्थित खारलाची गेट के पास हुई इस भारी गोलीबारी में कम से कम 7 पाकिस्तानी जवानों ने अपनी जान गंवाई है। तोपखाने और छोटे हथियारों के इस उपयोग ने इलाके की लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से पंगु बना दिया है।\n\n### क्षेत्रीय व्यापार पर असर\n\nइस इलाके में कारोबार करने वाली कंपनियों और निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता अचानक व्यापार बंद होने की है। सीमा बंद होने से जरूरी सामान और कच्चे माल की सप्लाई रुक गई है, जिससे पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। जब बॉर्डर पॉइंट बंद होते हैं, तो सप्लाई चेन में अड़चनें आती हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए खर्च और देरी का संकट बढ़ जाता है।\n\n### जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और जोखिम\n\nइन झड़पों का बार-बार होना इस बात का सबूत है कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए कोई ठोस कूटनीतिक तंत्र मौजूद नहीं है। इस्लामाबाद और काबुल दोनों ने इस घटना के लिए एक-दूसरे पर आरोप मढ़े हैं, जिससे माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। निवेशकों के लिए ऐसी अस्थिरता बाजार के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डालती है और दक्षिण एशियाई बाजारों में रिस्क प्रीमियम को बढ़ा देती है। फिलहाल, व्यापार के दोबारा शुरू होने के स्पष्ट संकेत न मिलने से क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, जिस पर नजर रखना हर स्टेकहोल्डर के लिए जरूरी है।
