प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की। 18वें BRICS समिट से पहले हुई इस मीटिंग का मुख्य फोकस आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और **2030** तक **$100 बिलियन** का ट्रेड टारगेट हासिल करना है, जिसका सीधा असर एनर्जी और डिफेंस सेक्टर पर पड़ेगा।
आर्थिक एजेंडे पर फोकस
नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने न केवल अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया, बल्कि आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का खाका भी तैयार किया। भारत और रूस के बीच $100 बिलियन का ट्रेड टारगेट हासिल करने के लिए एनर्जी सप्लाई चेन और डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़े बदलावों की चर्चा हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारत के लिए रूस क्रूड ऑयल का एक प्रमुख सप्लायर बना हुआ है। इस व्यापारिक रिश्ते में मजबूती सीधे तौर पर भारत के एनर्जी इंपोर्ट बिल और रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करती है। इसके अलावा, डिफेंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर होने वाले समझौते उन भारतीय कंपनियों के लिए गेम-चेंजर हो सकते हैं जो डिफेंस और हेवी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं।
चुनौतियां और व्यापार संतुलन
हालांकि, भारत के सामने फिलहाल रूस के साथ ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) की बड़ी चुनौती है। रूस से तेल, कोयला और डिफेंस हार्डवेयर का भारी आयात होता है, लेकिन निर्यात उस तुलना में कम है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब भारत फार्मास्यूटिकल्स, एग्रीकल्चर और हाई-टेक कंपोनेंट्स के एक्सपोर्ट को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके साथ ही, वेस्टर्न सेंक्शंस और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच सप्लाई चेन की सुरक्षा भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण 'मॉनिटरेबल' फैक्टर बनी रहेगी।
