बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने **2025** में मिली मौत की सजा को दरकिनार करते हुए, इस दिसंबर घर लौटने का फैसला किया है। **2024** से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहीं Hasina का यह कदम दक्षिण एशिया में नई राजनीतिक अस्थिरता का संकेत दे रहा है, जो सीमा-पार व्यापार पर असर डाल सकता है।
पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने पुष्टि की है कि वह दिसंबर 2026 में वापस स्वदेश लौटेंगी। यह निर्णय उनके और वर्तमान प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को एक नए स्तर पर ले गया है। अगस्त 2024 में हुए जन-आंदोलन के बाद वे भारत में रह रही हैं, जिसने उनके 15 साल के कार्यकाल को समाप्त कर दिया था।
उनकी वापसी का रास्ता आसान नहीं है। नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई के लिए 'इन-एब्सेंशिया' (अनुपस्थिति में) मौत की सजा सुनाई थी। कानूनी खतरों और गिरफ्तारी की तलवार लटकने के बावजूद, Hasina का कहना है कि वे अपनी पार्टी, 'Awami League', जिसे वर्तमान में प्रतिबंधित कर दिया गया है, के दमन के बीच विदेश में नहीं रह सकतीं।
बाजार पर असर और चिंताएं
फरवरी 2026 के चुनावों के बाद प्रधानमंत्री Tarique Rahman ने सत्ता संभाली है। इस बीच, भारत के लिए बांग्लादेश का महत्व टेक्सटाइल, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बहुत अधिक है। किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर सप्लाई चेन और बिजनेस कॉन्फिडेंस पर पड़ता है।
निवेशकों की नजर अब दिल्ली के कूटनीतिक रुख और ढाका में सुरक्षा उपायों पर टिकी है। यदि दिसंबर में उनकी वापसी से कोई भी नागरिक अशांति पैदा होती है, तो दक्षिण एशियाई बाजार में काम करने वाली कंपनियों के लिए परिचालन संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
