यमन के जफ प्रांत में एक जेल पर हुए हमले के बाद तनाव बढ़ गया है, जिसके चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। सउदी गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते टकराव से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
यमन के हज़्म शहर में एक डिटेंशन सेंटर पर हुए एयरस्ट्राइक के आरोपों के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मच गई है। हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी गठबंधन पर लगाए गए इन आरोपों के बाद इलाके में लंबे समय से बना हुआ सीजफायर अब खतरे में है।
मार्केट पर असर और Saudi Aramco
सोमवार को बाजार खुलते ही ऑयल प्राइसेज में तेजी देखी गई। ट्रेडर्स सऊदी बॉर्डर के पास Saudi Aramco के इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों को लेकर डरे हुए हैं, जिससे प्रोडक्शन प्रभावित होने की आशंका है। ग्लोबल सप्लाई चेन पहले ही दबाव में है, ऐसे में यह भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट आग में घी का काम कर रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता
भारत के लिए यह खबर किसी बड़े रिस्क से कम नहीं है। चूँकि हम अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में तेजी का सीधा असर हमारे इंपोर्ट बिल पर पड़ेगा।
- महंगाई का दबाव: क्रूड के दाम बढ़ने से देश में फ्यूल कॉस्ट बढ़ेगी, जो इन्फ्लेशन को बढ़ा सकती है।
- सेक्टर पर असर: एविएशन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों पर मार्जिन का दबाव बढ़ने की पूरी संभावना है।
आगे क्या होगा?
हूती नेताओं ने सऊदी के सर्विलांस ड्रोन्स को मार गिराने का दावा किया है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। रेड सी (Red Sea) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रास्तों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचा, तो ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। निवेशकों को फिलहाल एनर्जी कंपनियों के आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह संकट केवल कुछ समय के लिए है या सप्लाई चेन पर इसका लॉन्ग-टर्म असर होगा।
