उत्तर कोरिया ने अपनी नौसेना को मजबूत करते हुए दूसरा **5,000-टन** का डिस्ट्रॉयर 'Kang Kon' कमीशन किया है। किम जोंग उन इस कदम के जरिए अपनी परमाणु स्ट्राइक क्षमताओं को बढ़ाने में जुटे हैं, जिससे प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
ताकत में बड़ा इजाफा
वॉनसन बंदरगाह पर आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में उत्तर कोरिया ने अपने दूसरे 5,000-टन वजनी डिस्ट्रॉयर 'Kang Kon' को बेड़े में शामिल कर लिया है। नेता किम जोंग उन ने अपनी बेटी किम जू ए के साथ इस समारोह में शिरकत की। यह 'Choe Hyon' क्लास का दूसरा युद्धपोत है, जबकि इस सीरीज का पहला जहाज जून 2026 में सेवा में आया था। यह कदम देश की समुद्री सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
परमाणु क्षमता और हथियार
यह डिस्ट्रॉयर उत्तर कोरिया के 'स्टेट न्यूक्लियर काउंटरएक्शन सिस्टम' का अहम हिस्सा है। आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह जहाज ऐसी मिसाइल प्रणालियों से लैस है जो परमाणु हमले का जवाब देने में सक्षम हैं। प्योंगयांग का दावा है कि वह अपने बचाव के लिए एक विविधीकृत परमाणु निवारक (Nuclear Deterrent) तैयार कर रहा है।
क्षेत्रीय तनाव और मार्केट पर असर
यह घटनाक्रम 'Freedom Edge' मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान सामने आया है, जिसमें अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के सैन्य अभ्यास शामिल हैं। हालांकि ये देश इसे स्थिरता के लिए जरूरी बता रहे हैं, लेकिन प्योंगयांग इसे संभावित आक्रमण की तैयारी मानता है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स के लिए यह तनाव चिंता का विषय है। प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य हलचल से एनर्जी सिक्योरिटी और समुद्री व्यापार मार्गों पर असर पड़ सकता है। यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो एशियाई इक्विटी मार्केट्स में रिस्क प्रीमियम बढ़ने की आशंका बनी रहेगी, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हो सकता है।
