बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। पूर्व AFP ब्यूरो चीफ शफीकुल आलम के मुताबिक, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और प्री-प्लांड साजिश थी।
क्या था पूरा सच?
पूर्व AFP ब्यूरो चीफ शफीकुल आलम के दावों ने उन सभी कयासों को हवा दे दी है जिनमें इसे एक 'स्वतःस्फूर्त' (spontaneous) बदलाव बताया जा रहा था। आलम के मुताबिक, AFP के फैक्ट-चेक डिविजन के कदीरुद्दीन शिशिर ने छात्र प्रदर्शनकारियों और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक सीक्रेट चैनल तैयार किया था। यह सब तब हो रहा था जब शेख हसीना की सरकार सत्ता में ही थी।
सत्ता परिवर्तन या सोची-समझी रणनीति?
यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि सत्ता का यह हस्तांतरण अचानक नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चर्ड ऑपरेशन था। छात्र नेताओं और यूनुस के बीच की यह सीक्रेट को-ऑर्डिनेशन भविष्य में आने वाले पावर वैक्यूम (power vacuum) को भरने की तैयारी थी। 8 अगस्त 2024 को शेख हसीना के इस्तीफे के बाद, जो अंतरिम सरकार बनी, उसमें इन्हीं प्रदर्शनकारियों के मुख्य चेहरों को शामिल किया गया।
नई पार्टी और भविष्य की चुनौती
अब यह मामला केवल सत्ता के बदलाव तक सीमित नहीं रहा है। पूर्व छात्र नेताओं ने 'नेशनल सिटीजन पार्टी' (National Citizen Party) का गठन करके इसे एक औपचारिक राजनीतिक मोड़ दे दिया है। साउथ एशिया के पड़ोसी देशों और वहां कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
ढाका की बदलती राजनीति का असर सीधे तौर पर क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड (cross-border trade) और डिप्लोमैटिक संबंधों पर पड़ेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर अब इस पर है कि यूनुस सरकार और उनकी नई राजनीतिक इकाई लंबे समय तक कितनी स्थिरता दे पाती है, क्योंकि क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक दृष्टिकोण से बांग्लादेश का यह नया चेहरा अभी अनिश्चितता के दौर में है।
