इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान की सत्ता को पलटने को अपना आधिकारिक सुरक्षा लक्ष्य घोषित कर दिया है। यह बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों और महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में एक सुरक्षा समारोह के दौरान अपने देश की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने ईरान की सरकार को सत्ता से बेदखल करने को अब आधिकारिक 'नेशनल सिक्योरिटी गोल' के रूप में पेश किया है। गाजा और लेबनान में जारी सैन्य अभियानों को अब तेहरान के खिलाफ एक लंबी और बड़ी जंग के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
भारतीय बाजारों पर क्या होगा असर?
निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता का संकेत है। ईरान एक बड़ा तेल उत्पादक देश है। यदि तनाव और बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसी सप्लाई लाइन्स प्रभावित होती हैं, तो कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में तेल का आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ना सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव डाल सकता है।
बाजार का मिजाज और अस्थिरता
जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) मोड में चले जाते हैं। वे शेयर बाजार जैसे अस्थिर एसेट्स से निकलकर सुरक्षित निवेश की तलाश करने लगते हैं। यह लंबी लड़ाई का संकेत भारतीय इक्विटी मार्केट्स में बड़ी वोलैटिलिटी (Volatility) पैदा कर सकता है। ऐसे में वैश्विक व्यापार और मिडिल ईस्ट से जुड़े सप्लाई चेन वाले सेक्टर्स पर खास नजर रखने की जरूरत है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
आने वाले हफ्तों में निवेशकों को मुख्य रूप से क्रूड ऑयल की कीमतों के मूवमेंट पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, ग्लोबल शक्तियों के राजनयिक बयानों का भी बाजार पर असर पड़ेगा। सरकार और सेंट्रल बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं, यह भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
