इजरायल में **27 अक्टूबर** को होने वाले चुनाव से पहले प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने संभावित हमलों की चेतावनी दी है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि थ्रेट लेवल में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
इजरायल की राजनीति में उस समय तनाव बढ़ गया जब प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने Tel Nof एयर फोर्स बेस के दौरे पर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, 27 अक्टूबर के चुनाव से पहले दुश्मन देश हमला कर सकते हैं। हालांकि, पीएम ने सुरक्षा एजेंसियों के हाई अलर्ट पर होने की बात कही, लेकिन उनके इस सार्वजनिक बयान ने तुरंत बहस छेड़ दी है।
सुरक्षा एजेंसियों और सरकार में मतभेद
इस मामले में सरकार के बयानों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के बीच बड़ा अंतर दिख रहा है। मिलिट्री और खुफिया विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के मौजूदा स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। न तो अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है और न ही नेशनल अलर्ट लेवल बढ़ाया गया है, जो किसी भी वास्तविक और तत्काल खतरे के समय अनिवार्य होता है। आलोचकों का कहना है कि यह चेतावनी केवल चुनावी लाभ के लिए दी गई है।
विपक्ष का तीखा हमला
विपक्ष के नेता Yair Lapid ने पीएम के इस 'अलार्मिस्ट' रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। Lapid ने कहा कि ऐसी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक चुनावी मंचों के बजाय प्रोफेशनल चैनलों के जरिए हैंडल किया जाना चाहिए। उन्होंने Shin Bet के प्रमुख और सेंट्रल इलेक्शंस कमेटी के चेयरमैन के साथ एक आपात बैठक की मांग की है ताकि यह साफ हो सके कि इन दावों में कोई सच्चाई है या यह सिर्फ वोट बैंक को प्रभावित करने का हथकंडा है।
Likud पार्टी का बचाव
दूसरी ओर, Likud पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विपक्ष पर ही उल्टा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी दल राष्ट्रीय सुरक्षा को दरकिनार कर इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं। चूंकि चुनाव में मुकाबला बेहद कांटे का है, ऐसे में यह घटनाक्रम देश के राजनीतिक माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर रहा है।
