इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने वेस्ट बैंक में सेटलर्स द्वारा की गई हिंसा की कड़ी निंदा की है और इसे आपराधिक करार दिया है। गाजा में जारी सैन्य अभियानों और ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बीच, ये भू-राजनीतिक तनाव ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
हिंसक घटनाओं पर एक्शन की मांग
वेस्ट बैंक के कुसरा (Qusra) और जालुद (Jalud) गांवों में पिछले दो हफ्तों से जारी अशांति पर पहली बार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का सख्त रुख सामने आया है। उन्होंने दंगाइयों को एक छोटा गुट बताते हुए उनके कार्यों को पूरी तरह से गैर-कानूनी और आपराधिक बताया है। इस मामले में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को आतंकवादी करार दिया है। हालांकि, अगस्त 2026 के अंत तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गाजा और ईरान में बदलती परिस्थितियां
एक तरफ गाजा में सैन्य अभियान जारी है, जिसमें हालिया हमलों में 3 नागरिकों की मौत की खबर है, तो दूसरी तरफ ईरान में सत्ता का केंद्र बदल रहा है। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खमेनेई अपने वफादारों को सुरक्षा और सैन्य पदों पर नियुक्त कर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जो क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए मायने
मिडिल ईस्ट का यह भू-राजनीतिक तनाव भारतीय शेयर बाजार के लिए सीधे तौर पर चिंता का विषय है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, और इस क्षेत्र में जारी अस्थिरता का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ता है। निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि ग्लोबल टेंशन बढ़ने पर एनर्जी कॉस्ट और सप्लाई चेन में बाधा आती है, जो अंततः मार्केट में लिक्विडिटी और इक्विटी सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती है।
